कुंडलिनी कुंड से जागकर सुदर्शन चक्र रूपी वैकल्पिक कालचक्र को क्रियाशील कर देती है, जिसमें शरीरविज्ञान दर्शन एक आधुनिक कुंडलिनी तंत्र पुस्तक बहुत मदद करती है

कुंडलिनी शब्द को कहते हैं कि यह शास्त्रों में नहीं है। पर कुंड शब्द तो शिवपुराण में बहुत है। संस्कृत भाषा में कान के कुंडल या छल्ले जैसे आकार वाला पुलिंग पदार्थ कुंडली हुआ और ऐसे आकार वाली स्त्रीलिंग वस्तु कुंडलिनी कहलाई। शायद कुंडल शब्द भी कुंड शब्द से बना है। दोनों में संबंध तो […]

कुंडलिनी कुंड से जागकर सुदर्शन चक्र रूपी वैकल्पिक कालचक्र को क्रियाशील कर देती है, जिसमें शरीरविज्ञान दर्शन एक आधुनिक कुंडलिनी तंत्र पुस्तक बहुत मदद करती है

Published by Dharmendra Ray

Blogger

Leave a Reply

Create your own website, free on WordPress.com.Create your own website.
Start free